GSTN की लेखा-परीक्षा: संवैधानिक या असंवैधानिक

डॉ० स्वामी जी॰एस॰टी॰एन॰ के ख़िलाफ़ सप्रीम कोर्ट में जाने की धमकी दे चुके हैं

डॉ० स्वामी जी॰एस॰टी॰एन॰ के ख़िलाफ़ सप्रीम कोर्ट में जाने की धमकी दे चुके हैं
डॉ० स्वामी जी॰एस॰टी॰एन॰ के ख़िलाफ़ सप्रीम कोर्ट में जाने की धमकी दे चुके हैं

[dropcap color=”#008040″ boxed=”yes” boxed_radius=”6px” class=”” id=””]वित्त[/dropcap] मंत्री के हाल ही में दिए गए एक साक्षात्कार के बाद जी॰एस॰टी॰एन॰ के मामले में एक नया पेंच फँस गया है। आपको यहाँ बता दें कि जी॰एस॰टी॰एन॰, जी॰एस॰टी॰ की सूचना तकनीक रूपी रीड की हड्डी है। पिछली कांग्रेस सरकार में तत्कालीन वित्त मंत्री श्री पी० चिदंबरम ने जी॰एस॰टी॰एन॰ को सी॰ए॰जी॰ के अधिकार – क्षेत्र से बाहर रखा रखा था। जिसकी समय समय पर तीखी आलोचना होती रही है।

आने वाले समय में यह देखना रोचक होगा की वित्त मंत्रालय का यह फ़ैसला कितना कारगर साबित होगा क्यूँकि एक तरफ़ जहाँ डॉ० स्वामी जी॰एस॰टी॰एन॰ के ख़िलाफ़ सप्रीम कोर्ट में जाने की धमकी दे चुके हैं वहीं देश के सी॰ए॰जी॰ भी वित्त मंत्रालय को जी॰एस॰टी॰एन॰ की लेखा-परीक्षा पर पूर्ण-स्वामित्व की अपनी माँग से अवगत कर चुके हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ० सुब्रमण्यम स्वामी के अलावा कई अर्थशास्त्री और वित्त मामलों के जानकार इस बात की पैरवी करते रहें है की जी॰एस॰टी॰एन॰ की लेखा-परीक्षा करने का अधिकार पूर्ण रूप से देश के नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक यानी सी॰ए॰जी॰ के पास होना चाहिए।

भारत के संविधान में सी॰ए॰जी॰ को बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। भीमराव अम्बेडकर ने तो एक बार यह तक कहा था कि यदि सी॰ए॰जी॰ को भरतीय संविधान का सबसे महतवपूर्ण अधिकारी भी कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। इसलिए जब चिदम्बरम ने जी॰एस॰टी॰एन॰ को सी॰ए॰जी॰ के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखने का फ़ैसला किया तो इसे संविधान पे हमले के रूप में देखा गया।

हाल ही में एक प्राइवेट न्यूज़ चैनल को दिए साक्षात्कार में वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने इस बात का ख़ुलासा किया की उन्होंने जी॰एस॰टी॰एन॰ की लेखा-परीक्षा का अधिकार देश के सी॰ए॰जी॰ को दे दिया है क्यूँकि उनके भाजपा सहयोगी डॉ० स्वामी द्वारा जी॰एस॰टी॰एन॰ की लेखा-परीक्षा के लिए उठाया गया मुद्दा जायज़ है। लेकिन नाम ना छापने की शर्त पर वित्त मंत्रालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि सी॰ए॰जी॰ को जी॰एस॰टी॰एन॰ की लेखा-परीक्षा का पूर्ण-स्वामित्व नहीं दिया गया है और यह सब खानापूर्ति मात्र है।

आने वाले समय में यह देखना रोचक होगा की वित्त मंत्रालय का यह फ़ैसला कितना कारगर साबित होगा क्यूँकि एक तरफ़ जहाँ डॉ० स्वामी जी॰एस॰टी॰एन॰ के ख़िलाफ़ सप्रीम कोर्ट में जाने की धमकी दे चुके हैं वहीं देश के सी॰ए॰जी॰ भी वित्त मंत्रालय को जी॰एस॰टी॰एन॰ की लेखा-परीक्षा पर पूर्ण-स्वामित्व की अपनी माँग से अवगत कर चुके हैं।

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