सनसनीखेज खुलासा: ‘हरिजन’ में छपे गांधी का लेख जो कांग्रेस पार्टी ने कभी मानी नहीं

कांग्रेस ने महात्मा की आखिरी इच्छा पर ध्यान क्यों नहीं दिया?

महात्मा
गांधीजी की आखरी इच्छा

27 जनवरी, 1948 को, हत्या के 3 दिन पहले महात्मा गांधी ने एक लेख लिखा था जिसमें यह सुझाव दिया गया था कि कांग्रेस पार्टी भंग होनी चाहिए और उसके सभी सदस्यों को एक संस्था में स्वयंसेवक बन जाना चाहिए। उन्होंने इस संस्था को ‘लोकसेवक संघ’ के नाम से संबोधित किया था।

यह आज तक एक रहस्य है कि कांग्रेस ने महात्मा की आखिरी इच्छा पर ध्यान क्यों नहीं दिया।

इस लेख की एक प्रतिलिपि अंत में प्रस्तुत की गई है। पहले के एक लेख में, हमने इस तथ्य का उल्लेख किया था जिसमें महात्मा के अंतिम निजी सचिव कल्याणम को उद्धृत किया गया था:

“गांधीजी की ऐसी मांग के पीछे ठोस कारण थे। कांग्रेस को भारतीय स्वतंत्रता का आंदोलन करने के लिए शुरू किया गया था। इसके पास कोई अन्य मिशन नहीं था। पार्टी समस्त देशवासियों को जुटाकर पूरे देश का समर्थन उस उद्देश्य के लिए हासिल कर सकती थी जिसके लिए वह लड़ रही थी। एक बार देश औपनिवेशिक शासन से मुक्त हो गया तो कांग्रेस का मकसद भी खत्म हो गया था। गांधी ने नेताओं से आग्रह किया था कि कांग्रेस के संगठन को भंग करके समस्त देशवासियों के कल्याण के लिए काम करने के लिए ‘लोकसेवक संघ’ या राष्ट्र के सेवकों की स्थापना करना,”…

लेख के अंतिम पैराग्राफ में उल्लेख है। यह लगभग ऐसा ही है कि गांधीजी को पूर्वज्ञान था :
मैंने भविष्य को देखते हुए विचार रखा है। यदि मेरे पास समय और स्वास्थ्य हुआ, तो मैं इन स्तंभों में चर्चा करूँगा कि राष्ट्र के सेवक अपने स्वामियों, जो कि देश की समस्त वयस्क महिला और पुरुष जनसंख्या हैं, की नज़रों में खरा उतरने के लिए क्या कर सकते हैं।

यह आज तक एक रहस्य है कि कांग्रेस ने महात्मा की आखिरी इच्छा पर ध्यान क्यों नहीं दिया। क्या पार्टी, सत्ता में नशे में चूर, अच्छे जीवन का आनंद लेना जारी रखना चाहती थी? ऐसे परिदृश्य में जहां कांग्रेस कोई राजनीतिक दल नहीं था, गांधी ने नगर-वासियों के एक ऐसे समूह की कल्पना की जो देश को चलाने के लिए आवश्यक राजनैतिक नेतृत्व प्रदान करने के लिए आगे आएंगे।

नीचे 1 फरवरी, 1948 को ‘हरिजन’ में प्रकाशित हुए लेख की एक प्रति दी गई है:

इस लेख का एक और उल्लेख 9 फरवरी,1948 को प्रकाशित हुए ‘नेशनल स्टैंडर्ड’ के संस्करण में भी है:

Gandhi's article in the Feb 1st, 1948 issue of The Harijan
Gandhi's article in the Feb 1st, 1948 issue of The Harijan
Fig 1. Gandhi’s article in the Feb 1st, 1948 issue of The Harijan

Another mention of the same article has also appeared in National Standard on February 9, 1948:

National Standard issue, Feb 9th, 1948 issue
Fig 1. National Standard issue, Feb 9th, 1948 issue

 

Note:
1. The views expressed here are those of the author and do not necessarily represent or reflect the views of PGurus.

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