समय की मांग: प्रधानमंत्री करें कार्रवाई, चिदंबरम और कार्ति के खिलाफ मामलों में देरी के लिए सीबीआई है जिम्मेदार

चिदंबरम और उनके बेटे के खिलाफ कार्रवाई करने में बार बार हो रहे विलंब ने मोदी की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगाना शुरू कर दिया है

चिदंबरम और उनके बेटे के खिलाफ कार्रवाई करने में बार बार हो रहे विलंब ने मोदी की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगाना शुरू कर दिया है
चिदंबरम और उनके बेटे के खिलाफ कार्रवाई करने में बार बार हो रहे विलंब ने मोदी की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगाना शुरू कर दिया है

केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ती चिदंबरम से संबंधित भ्रष्टाचार के मामलों को संभालने में बुरी तरह से विफल हुआ है। आईएनएक्स मीडिया रिश्वत मामले और एयरसेल मैक्सिस घोटाले की छानबीन कर रहे सीबीआई अधिकारियों को लंबे समय पहले ही उनके सम्मनों की अवमानना के लिए कार्ति को गिरफ्तार कर लेना चाहिए था। क्या चिदंबरम से जुड़े मामलों पर धीमा चलने के लिए सीबीआई अधिकारियों को उनके राजनीतिक स्वामियों से कोई संदेश मिला था, या फिर उनके ऊपर अपने पूर्व बॉस चिदंबरम के लिए “निष्ठा” का प्रभाव है? चाहे कुछ भी हो, यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए सीबीआई में गुमराह अधिकारियों को निकाल फेंकने का समय है, क्योंकि आखिर में वही सबसे ऊपर जो हैं।

यह पूरी तरह स्पष्ट है कि मोदी सरकार में चिदंबरम के दोस्त सीबीआई से धीमी गति से चलने को कह रहे हैं। अन्यथा, हम जानते हैं कि सीबीआई कैसे कार्य करती है और इन मामलों पर सुनवाई अब तक शुरू हो गई होती। ये आपके दोस्त भी हैं, श्रीमान मोदी। और ऐसे दोस्तों के साथ आपको दुश्मनों की ज़रूरत ही नहीं है।

प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग की चेन्नई इकाई ने पहले ही दिसंबर, 2015 और जनवरी, 2016 में छापे मारे थे और 14 देशों में कार्ती और चिदंबरम परिवार के सदस्यों की संपत्ति और 21 अघोषित विदेशी बैंक खातों का पर्दाफाश किया था। जब इसको लेकर फरवरी, 2016 में मीडिया में हड़कंप मचा, तो वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में दावा किया था कि जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। लोग मूर्ख नहीं हैं जो अरुण जेटली के अपने करीबी दोस्त चिदंबरम के खिलाफ कार्रवाई करने के आश्वासन पर विश्वास करेंगे। लेकिन फिर भी नरेंद्र मोदी में कई लोग विश्वास करते हैं और उनके लिए यह समय है कि लोगों के विश्वास को पुनः हासिल करे।

PGurus ने भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी द्वारा 2017 के मध्य में चिदंबरम परिवार के अवैध संपत्ति और बैंक खातों का खुलासा किए जाने के बाद चिदंबरम रहस्य नामक एक विस्तृत लेख में दस्तावेजों सहित ब्यौरा दिया था। स्वामी की शिकायत पर, प्रधान मंत्री ने जल्द ही वित्त मंत्रालय के अधीन केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ( सीबीडीटी ) को नए ‘काला धन कानून’ और ‘बेनामी कानून’ के तहत मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग की चेन्नई यूनिट द्वारा कार्ति की कंपनियों पर छापा मार के कंप्यूटरों का डेटा जब्त करने से ये सभी निष्कर्षों का सही पाए गए। लेकिन दिल्ली में सीबीडीटी के वरिष्ठ अधिकारी मामले को लंबा खींचते हुए इन 14 देशों को पत्र भेजने में व्यस्त हैं ताकि उनके पूर्व स्वामी चिदंबरम को बचने का रास्ता मिल सके। क्या बेहूदा बकवास है! इस दुष्ट को जेल में डालो और इसके सह-षड्यंत्रकारियों के नामों का पता लगाके उन्हें भी जेल में भी डालो। लंबे समय तक कष्ट झेल रहे करदाताओं के धन पर बहुत हुआ अत्याचार।

राजस्व विभाग के अधीन सीबीडीटी जैसे कई विभाग मूक दर्शकों बने हुए थे जब कार्ति आईएनएक्स मीडिया रिश्वत मामले में एफआईआर और जारी किए गए “लुक आउट नोटिस” के संबंध में अपनी लंदन यात्रा के लिए बहस कर रहे थे। बहुत ही अप्रत्याशित तौर पर सीबीआई ने कभी सुप्रीम कोर्ट को कभी नहीं बताया कि कार्ती एयरसेल-मैक्सिस घोटाले में उनके दो सम्मन नोटिस का पालन नहीं कर रहे हैं। यदि यह कोई अन्य व्यक्ति होता तो उसे अब तक गिरफ्तार कर लिया गया होता अगर वह पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं होता। आईएनएक्स मीडिया मामले में, कार्ति को सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई के समक्ष पेश होने के लिए मजबूर किया था, जिसने उससे दो बार पूछताछ की और अब पिछले दो महीनों से सीबीआई सुप्तावस्था में है।

ईडी ने पता लगाया था कि पी चिदम्बरम द्वारा वित्त मंत्री के रूप में आईएनएक्स मीडिया को अवैध एफआईपीबी मंजूरी देने के लिए कार्ती को 5 करोड़ रुपये का रिश्वत मिली थी। एयरसेल-मैक्सिस में कार्ति और उनकी फर्मों को रिश्वत के रूप में लगभग 2 करोड़ रुपये स्वीकारने के लिए पकड़ा गया था। एयरसेल-मैक्सिस में चिदंबरम द्वारा किए गए उल्लंघनों की सीबीआई पहले ही विस्तार से व्याख्या कर चुकी है। पिछले तीन सालों से सीबीआई सर्वोच्च न्यायालय को कह रही है कि वे जल्द ही इस पर कार्रवाई करेंगे लेकिन वे फिर से जाकर सो जाते हैं। यह पूरी तरह स्पष्ट है कि मोदी सरकार में चिदंबरम के दोस्त सीबीआई से धीमी गति से चलने को कह रहे हैं। अन्यथा, हम जानते हैं कि सीबीआई कैसे कार्य करती है और इन मामलों पर सुनवाई अब तक शुरू हो गई होती। ये आपके दोस्त भी हैं, श्रीमान मोदी। और ऐसे दोस्तों के साथ आपको दुश्मनों की ज़रूरत ही नहीं है।

आयकर विभाग जिसके पास भी गिरफ्तार करने की ताकत है, वह नए ‘काला धन कानून’ और नए ‘बेनामी कानून’ के तहत कार्रवाई करने की बजाय चुप्पी साधे हुए है। कार्ती को गिरफ्तार किए बिना, सीबीआई ने उसे विदेश जाने के लिए बहस करने का मौका दिया। अगर एजेंसियों द्वारा महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं की जाती है तो अदालत किसी व्यक्ति को विदेश जाने से कैसे रोक सकती है? यह समय है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस स्थिति का संभालने और सीबीआई, सीबीडीटी के लचीले अधिकारियों को खींचने का।

श्री मोदी, आम आदमी ने आपके इरादों पर संदेह करना शुरू कर दिया है जब आप चुनाव रैलियों में दावा करते हैं कि आप भ्रष्ट लोगों को छोड़ेंगे नहीं। यहां जबरदस्त साक्ष्यों के साथ भ्रष्टाचार के दो मामले हैं जिनमें भ्रष्टों को जेल में होना चाहिए परन्तु किसी तरह कुछ होता है जो सभी प्रयासों पर विराम लगा देता है।

जो कल करे सो आज कर
जो आज करे सो अब कर
– कबीर

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2 COMMENTS

  1. मोदी की विश्वसनीयता पर सवाल कैसे? मोदी तो इन माफिया गैंग से मिला हुआ है

    आज कार्ति चिदंबरम को लन्दन जाने की छूट मिल गयी है इसका मतलब अब कार्ति का फरार होना तय है और फिर कभी भारत के कानून प्रवर्तन की चुंगल में नहीं आनेवाला है

  2. मोदी की विश्वसनीयता पर सवाल कैसे? मोदी तो इन माफिया गैंग से मिला हुआ है

    आज कार्ति चिदंबरम को लन्दन जाने की छूट मिल गयी है इसका मतलब अब कार्ति का फरार होना तय है और फिर कभी भारत के कानून प्रवर्तन की चुंगल में नहीं आनेवाला है

    Mr. Iyer,
    It is the height of your naivety to expect credibility from Modi.
    Modi is part of international Mafia functioning under Bill Gates to loot India. Chidambaram, Jaitely too are sharp shooters of the same MAFIA GANG.

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