मोदी सरकार द्वारा अटॉर्नी जनरल बनने के बाद मुकुल रोहतगी 2-जी मामले के आरोपी के लिए उपस्थित हुए

जब पूर्व एजी मुकुल रोहतगी ने कहा कि वह 2-जी के फैसले का समर्थन करते हैं, तो क्या उन्होंने यह पुष्टि की कि एजी के रूप में उनकी भूमिका के तहत उनकी सरकार ने गड़बड़ी की थी ?

2G फैसले के लिए एजी रोहतगी दोषी
2G फैसले के लिए एजी रोहतगी दोषी

इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि अटॉर्नी जनरल बनने से पहले, रोहतगी, 2014 के मध्य तक कई 2-जी आरोपियों, जैसे कि अनिल अंबानी के रिलायंस टेलीकॉम और अन्य कई के मामले में उच्च न्यायालयों में सुप्रीम कोर्ट के सामने उपस्थित हुए |

वरिष्ठ भाजपा नेता और मुख्य 2-जी घोटाले के मामले में याचिकाकर्ता, सुब्रमण्यम स्वामी ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से विवादग्रस्त 2-जी परीक्षण अदालत के फैसले को चुनौती देने के लिए प्रभावी कदम उठने के लिए आग्रह किया | 21 दिसंबर को सुनवाई के फैसले के तुरंत बाद लिखे गए पत्र में स्वामी ने पूर्व अटॉर्नी जनरल (एजी) मुकुल रोहतगी, जिन्होंने अटार्नी जनरल बनने से पहले 2-जी घोटाले में कई अभियुक्तों का प्रतिनिधित्व किया था, के खिलाफ मुक़दमे अदालत के फैसले का स्वागत करने के लिए अपना गुस्सा जाहिर किया |

28 मई 2014 को, जिस दिन उन्होंने टीवी चैनलों में यह घोषणा की कि वह अटॉर्नी जनरल बनने के लिए भारत सरकार की पेशकश को स्वीकार करने के लिए सम्मानित थे[2], वह सीबीआई के खिलाफ मुक़दमे में आरोपी शाहिद बलवा के लिए अदालत में पेश हुए [3]|

रोहतगी की संदिग्ध गतिविधियों को बताते हुए, स्वामी ने कहा कि रोहतगी अक्सर विधायक और भ्रष्ट तत्वों के साथ दुबई जाते थे | जुलाई 2016 में, PGurs ने राजीव अग्रवाल और एजी रोहतगी, जो दुबई में तस्करी से संबंधित मामलों में एक बार जेल गए थे, के विवादास्पद यात्रा की सूचना दी थी | अग्रवाल को 2000 के मध्य में राजस्व खुफिया विभाग (डीआरआई) द्वारा जेल भेजा गया था | अब राजीव अपने भाई संजय अग्रवाल के साथ मुंबई में एक कानूनी फर्म चला रहे हैं जो प्रॉम्प्ट लीगल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जाना जाता है |

PGurus ने एक लेख में अग्रवाल के साथ तत्कालीन अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी के यात्रा[1] के बारे में मैनिफेस्ट रिकॉर्ड को प्रकाशित किया था | यह पता चला कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने खुफिया ब्यूरो को इस मामले में जांच करने के लिए इस कहा था और खुफिया अधिकारिओं ने इसकी पुष्टि की |

इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि अटॉर्नी जनरल बनने से पहले, रोहतगी, 2014 के मध्य तक कई 2-जी आरोपियों, जैसे कि अनिल अंबानी के रिलायंस टेलीकॉम और उनके अभियुक्त कर्मचारियों, शाहिद बलवा और अन्य कई के मामले में उच्च न्यायालयों में सुप्रीम कोर्ट के सामने उपस्थित हुए |

28 मई 2014 को, जिस दिन उन्होंने टीवी चैनलों में यह घोषणा की कि वह अटॉर्नी जनरल बनने के लिए भारत सरकार की पेशकश को स्वीकार करने के लिए सम्मानित थे[2], वह सीबीआई के खिलाफ मुक़दमे में आरोपी शाहिद बलवा के लिए अदालत में पेश हुए [3]|

“आपको याद होगा कि मैंने आपको कई पत्र लिखे थे जिसमे मैंने यह बताया था कि भाजपा सरकार के लिए अटॉर्नी जनरल के रूप में श्री मुकुल रोहतगी की नियुक्ति भ्रष्टाचार से लड़ने की हमारी प्रतिबद्धता से असंगत है, और वह अक्सर कानून तोड़ने वाले और भ्रष्ट तत्वों के साथ दुबई जाते थे | निर्णय का समर्थन कर के आज उन्होंने सरकार, जिसने उन्हें अटार्नी जनरल के रूप में नियुक्त किया, को विश्वासघात किया है |

“किसी भी स्तिथि में भ्रष्टाचार से लड़ना और उसे दूर करना हमारी 2014 चुनाव का मुद्दा था और 2018 लोकसभा चुनावों में यह जवाबदेही का मुद्दा होगा | इसलिए, मैं आपको उच्च न्यायालय में फैसले को चुनौती देने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए आग्रह करता हूं ताकि हम अगले लोकसभा चुनाव में आलोचकों का जवाब दे सकें,” स्वामी ने तत्काल अपील की मांग की |

नीचे स्वामी ने प्रधान मंत्री को लिखे पत्र की एक प्रति है:

Subramanian Swamy’s Letter to PM on 2G Verdict Day Dec 21, 2017 by PGurus on Scribd

References:

[1] Why did AG travel with a smuggling case accused? Jul 24, 2016, PGurus.com

[2] Mukul Rohatgi appointed as Attorney General of IndiaMay 28, 2014, Economic Times

[3] 2G case: CBI says Balwa’s petition has sinister designMay 28, 2014, Economic Times

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